This site for your education.

The New Sites

Any query

thenewsites20@gmail.com

Happiness is the highest level of success.

Earth Science Scheme: सरकार ने 4,797 करोड़ रुपये की पृथ्वी विज्ञान योजना को मंजूरी दी, विज्ञान में नए क्षेत्रों की ऊर्जा

Earth Science Scheme: आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने पृथ्वी प्रणालियों और जलवायु परिवर्तन के विज्ञान को समझने के लिए पृथ्वी विज्ञान योजना को 4,797 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। इसके तहत, फिलहाल चार हजार सात सौ 97 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और योजना में पांच स्कीमें शामिल की जाएगी।

इस बड़े निवेश के तहत, योजना में फिलहाल जारी पांच स्कीमों को शामिल किया जाएगा, जिनमें वातावरण और जलवायु अनुसंधान, समुद्री सेवाएं, संसाधन और प्रौद्योगिकी, पोलर साइंस, सीस्मोलोजी और जियोसाइंसिज समाहित हैं।

पृथ्वी विज्ञान योजना की शीर्षक्षेत्रें

  1. वातावरण और जलवायु अनुसंधान- मॉडलिंग आब्जर्विंग सिस्टम्स एंड सर्विसेज-ए सी आर ओ एस एस (Modeling Observing Systems and Services – ACROSS)
  2. समुद्री सेवाएं- मॉडलिंग एप्लीकेशन, संसाधन और प्रौद्योगिकी- ओ स्मार्ट (Modeling Applications, Resources and Technology – O Smart)
  3. पोलर साइंस एंड क्रायोस्फेयर्स रिसर्च- पी ए सी ई आर (PACER)
  4. सीस्मोलोजी एंड जियोसाइंसिज- एस ए जी ई और अनुसंधान (SAGE and Research)
  5. शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच- आर ई ए सी एच ओ यू टी (R E A C H O U T)

Earth Science Scheme का उद्देश्य

पृथ्वी विज्ञान योजना का मुख्य उद्देश्य है भू-प्रणाली और परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेत रिकॉर्ड करने के लिए वातावरण, समुद्र, भू-मण्डल, हिम-मण्डल और पृथ्वी के ठोस हिस्से का दीर्घकालिक अवलोकन करना। इसमें मौसम, समुद्र और जलवायु खतरों को समझने और अनुमान लगाने, तथा जलवायु परिवर्तन के विज्ञान को समझने के लिए मॉडलिंग प्रणालियों का विकास भी शामिल है।

ये भी पढ़ें: Qatar court: कतर के शीर्ष न्यायालय ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को जेल की सजा के खिलाफ अपील के लिए साठ दिन का समय दिया

पृथ्वी विज्ञान योजना के प्रमुख घटक

  1. वातावरण और जलवायु अनुसंधान: इस शाखा में मॉडलिंग आब्जर्विंग सिस्टम्स एंड सर्विसेज-ए सी आर ओ एस एस के अंतर्गत वातावरणीय परिवर्तनों की गहराई से अध्ययन किया जाएगा। यहां तक कि ब्रिज, बंदरगाह, और सड़कों का नक्शा तैयार करने के लिए सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सहारा लिया जाएगा।
  2. समुद्री सेवाएं: मॉडलिंग एप्लीकेशन, संसाधन और प्रौद्योगिकी- ओ स्मार्ट के माध्यम से समुद्री जीवों, जल संसाधन, और तटीय क्षेत्रों में परिवर्तनों का अध्ययन किया जाएगा।
  3. पोलर साइंस एंड क्रायोस्फेयर्स रिसर्च: पी ए सी ई आर के तत्वों के माध्यम से पोलर क्षेत्रों की गहराई से अध्ययन करना और यहां के जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए नए उपायों की खोज करना है।
  4. सीस्मोलोजी एंड जियोसाइंसिज: एस ए जी ई और अनुसंधान के माध्यम से भूकंपों, भूस्खलन, और भूगर्भीय प्रक्रियाओं को समझने के लिए यहां अगले दशकों में होने वाले संभावित परिवर्तनों का मॉडलिंग किया जाएगा।
  5. शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच: आर ई ए सी एच ओ यू टी के माध्यम से नौबत्ता, शोध, और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में समर्थन प्रदान करना है ताकि देश के युवा वैज्ञानिक तथा अनुसंधानकर्ता बन सकें।

पृथ्वी विज्ञान योजना के लाभ

पृथ्वी विज्ञान योजना के लागू होने से संपूर्ण राष्ट्र को विभिन्न क्षेत्रों में विज्ञानिक और तकनीकी उन्नति की दिशा में एक मजबूत कदम मिलेगा। यह योजना न केवल वातावरण और समुद्र अनुसंधान में मदद करेगी, बल्कि मौसम, समुद्र, और जलवायु से जुड़े खतरों को समझने में भी योजना को महत्वपूर्ण बनाए रखेगी।

ये भी पढ़ें: North Eastern Festival 2024: उत्तर पूर्वी महोत्सव 2024,13 से 17 जनवरी 2024 तक दिल्ली में आयोजित

नए क्षेत्रों की खोज

पृथ्वी विज्ञान योजना के अंतर्गत नए और उन्नत क्षेत्रों की खोज की जाएगी जो भविष्य में जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी की प्रणालियों के संबंध में महत्वपूर्ण रोल निभा सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भारत विज्ञान की राजधानी के रूप में अपनी निगमन स्थानीय और वैश्विक स्तर पर बनाए रखता है।

सरकार के इस बड़े पहल के साथ, भारत ने पृथ्वी के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए एक उच्च स्तरीय और समृद्धि भरा कार्यक्रम शुरू किया है। इस योजना से हम न केवल अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि विज्ञान और तकनीकी में भी नए मील के पत्थर प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रयास से हम गर्वित हैं कि हम आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर एक नेतृत्व भूमिका निभा रहे हैं और भविष्य में भी साइंटिफिक रिसर्च के क्षेत्र में अग्रणी रहेंगे।

सारांश

पृथ्वी विज्ञान योजना के अंतर्गत सरकार ने विज्ञान में नए क्षेत्रों की ऊर्जा दी है और देश को विज्ञानिक तथा अनुसंधान क्षेत्र में एक नए स्तर पर ले जाने का प्रयास किया है। इस योजना के माध्यम से हम अपनी प्राकृतिक संसाधनों का सही ढंग से प्रबंधन करके आने वाले कल के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

ये भी पढ़ें: Inspiration Program: शिक्षा मंत्रालय ने शुरू किया ‘प्रेरणा: अनुभव पर आधारित शिक्षा कार्यक्रम’

इस समाचार की जानकारी के स्रोत: AIR NEWS

सामान्य प्रश्न (FAQs) पृथ्वी विज्ञान योजना के बारे में

पृथ्वी विज्ञान योजना क्या है?
उत्तर: पृथ्वी विज्ञान योजना एक सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य पृथ्वी प्रणालियों और जलवायु परिवर्तन के विज्ञान को समझने, अध्ययन करने, और इसके प्रबंधन में सुधार करने का है।

इस योजना के तहत कितना निवेश किया जा रहा है?
उत्तर: सरकार ने पृथ्वी विज्ञान योजना के लिए चार हजार सात सौ 97 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

इस योजना के क्षेत्रों में कौन-कौन सी शाखाएं शामिल हैं?
उत्तर: इस योजना में वातावरण और जलवायु अनुसंधान, समुद्री सेवाएं, पोलर साइंस और क्रायोस्फेयर्स रिसर्च, सीस्मोलोजी और जियोसाइंसिज, शिक्षा, प्रशिक्षण और आउटरीच जैसी पांच प्रमुख शाखाएं शामिल हैं।

योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: पृथ्वी विज्ञान योजना का मुख्य उद्देश्य है भू-प्रणाली और परिवर्तन के महत्वपूर्ण संकेत रिकॉर्ड करना, मौसम, समुद्र और जलवायु खतरों को समझने और अनुमान लगाने, तथा जलवायु परिवर्तन के विज्ञान को समझना है।

योजना से कौन-कौन से नए क्षेत्रों की खोज की जा रही है?
उत्तर: पृथ्वी विज्ञान योजना से नए और उन्नत क्षेत्रों की खोज की जा रही है जो भविष्य में जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी की प्रणालियों के संबंध में महत्वपूर्ण रोल निभा सकते हैं।

 

error: Content is protected !!
झारखंड में 4919 कॉन्स्टेबल पदों पर भर्ती DSSSB ने TGT में 5118 रिक्त पदों पर भर्ती निकाली नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया में निकली भर्ती MP पावर जनरेटिंग कंपनी में अप्रेंटिस वैकेंसी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन में स्केल I ऑफिसर की वैकेंसी
झारखंड में 4919 कॉन्स्टेबल पदों पर भर्ती DSSSB ने TGT में 5118 रिक्त पदों पर भर्ती निकाली नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया में निकली भर्ती MP पावर जनरेटिंग कंपनी में अप्रेंटिस वैकेंसी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन में स्केल I ऑफिसर की वैकेंसी