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मोदी ने खोला भारतीय सांस्कृतिक खजाने का सीरियस राज, एक महान संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का खुलासा

पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन : आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारतीय विचार प्रसार एवं विकास संस्थान (भावना) में पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन किया। इस अद्भुत क्षण में, जहां इस अवसर पर उपस्थित गणमान्‍यजनों ने भी अपनी मौजूदगी बताई, वहां प्रधानमंत्री ने सभी उपस्थित विद्वानों, सांस्कृतिक प्रेमियों, और सरकारी अधिकारियों को संबोधित किया।एयर (AIR) के ट्वीट के अनुसार

प्रधानमंत्री का संबोधन

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “आज का दिन एक ऐसे महान विचारक और राष्ट्रनिर्माता, पंडित मदन मोहन मालवीय को समर्पित है। इस पुरातात्विक क्षेत्र में उनकी संकलित कृतियों का विमोचन करके हम उनके अद्वितीय योगदान को समर्थन कर रहे हैं।”

विमोचन का महत्व

इस महत्वपूर्ण संगठन के माध्यम से प्रधानमंत्री ने संकलित कृतियों के विमोचन का महत्व बताते हुए कहा, “पंडित मदन मोहन मालवीय जी के साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है। उनकी कृतियाँ हमें विभिन्न दिशाओं से उजागर करती हैं और हमें उनके दृढ़ दृष्टिकोण को समझने का अवसर देती हैं।”

एकत्रित कार्यों का महत्व

एकत्रित कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा, “एकत्रित कार्य हमारे अनुसंधान विद्वानों, राजनीति विज्ञानियों, और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन को समझने का द्वार खोलेगा। इससे हमें हमारे देश के उद्दीपन में और भी गहराईयों से नजर रखने का अवसर मिलेगा।”

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मालवीय जी के कार्यों की गुणवत्ता

प्रधानमंत्री ने पंडित मदन मोहन मालवीय जी के अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा, “महामना जी ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना, उस समय के कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत और अंग्रेजों के प्रति उनकी दृढ़ राय की घटनाओं को उजागर करता है। उनकी निजी डायरी भी एक खंड में शामिल है, जो हमें उनके विचारों और सोच के करीब ले जाती है।”

मालवीय जी की आदर्शवादी दृष्टि

प्रधानमंत्री ने जारी किये गए संबोधन में कहा, “महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे व्यक्ति जीवनकाल में जन्मजात होते हैं और पीढ़ियां उनकी ऋणी होती हैं। उनका योगदान हमारे देश की सांस्कृतिक और शैक्षिक उत्थान के क्षेत्र में हमें प्रेरित करता है।”

मालवीय जी की दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने कहा, “महामना मालवीय आधुनिक सोच और सनातन संस्कृति के संगम थे।” उन लोगों ने देश में आध्यात्मिकता का प्रसार किया और स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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मालवीय जी की सामर्थ्यपूर्ण दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री ने उनकी सामर्थ्यपूर्ण दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा, “महामना मालवीय जी की वर्तमान चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य के निर्माण पर भी एक दृष्टिकोण था। उन्होंने देश को सदैव पहली प्राथमिकता दी।”

सफलता की कीमत: भारत रत्न

प्रधानमंत्री ने समाप्त करते हुए कहा, “हमारे लिए एक और गर्व का क्षण है कि यह सरकार ने पंडित मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न से सम्मानित किया है। उनके योगदान को समझते हुए हमें उनके आदर्शों का पालन करना चाहिए ताकि हम भी अपने देश के उत्थान में योगदान दे सकें।”

इस समर्थन के साथ, प्रधानमंत्री ने समाप्त किया अपना संबोधन, जो सभी उपस्थित लोगों में गर्व और सम्मान की भावना जगाकर रख गया। इस विशेष पैम्बर समारोह के माध्यम से, हम सभी एक नए साल की शुरुआत में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति हमारी अविचल निष्ठा को पुनः पुर्वृत्त कर रहे हैं।

FAQs:

प्रश्न 1: किसका संकलित कृतियों का विमोचन हुआ?

उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में भारतीय विचार प्रसार एवं विकास संस्थान (भावना) में पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन किया गया है।

प्रश्न 2: इस अद्भुत क्षण में कौन-कौन शामिल थे?

उत्तर: इस अवसर पर उपस्थित थे गणमान्यजन, विद्वान, सांस्कृतिक प्रेमियों, और सरकारी अधिकारी।

प्रश्न 3: प्रधानमंत्री ने संकलित कृतियों के विमोचन के महत्व पर क्या कहा?

उत्तर: प्रधानमंत्री ने बताया कि संकलित कृतियों के विमोचन से पंडित मदन मोहन मालवीय जी के साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को समझने में मदद होगी और यह एक महत्वपूर्ण क्षण है।

प्रश्न 4: एकत्रित कार्यों का महत्व क्या है?

उत्तर: एकत्रित कार्य हमारे अनुसंधान विद्वानों, राजनीति विज्ञानियों, और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन को समझने का द्वार खोलेगा और देश के उद्दीपन में गहराईयों से नजर रखने का अवसर देगा।

प्रश्न 5: मालवीय जी के किस कार्य का उल्लेख किया गया है?

उत्तर: प्रधानमंत्री ने मालवीय जी के अनेक महत्वपूर्ण कार्यों, जैसे कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना, उनके दृढ़ राय की घटनाओं, और उनकी आदर्शवादी दृष्टि, का उल्लेख किया।

प्रश्न 6: मालवीय जी की सामर्थ्यपूर्ण दृष्टिकोण पर क्या टिप्पणी की गई है?

उत्तर: प्रधानमंत्री ने मालवीय जी की सामर्थ्यपूर्ण दृष्टिकोण की सराहना की है और कहा है कि उनका दृष्टिकोण आधुनिक सोच और सनातन संस्कृति के संगम को दर्शाता है।

प्रश्न 7: संबोधन के समाप्त होने पर प्रधानमंत्री ने क्या संदेश दिया?

उत्तर: संबोधन के समाप्त होने पर प्रधानमंत्री ने सभी को एक गर्व और सम्मान के भाव से नए साल की शुरुआत करने का संकेत दिया और उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति निष्ठा को पुनः पुर्वृत्त करने की पुनः प्रेरणा दी।

 

 

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